बोलने की रफ़्तार जाँचें: शब्द प्रति मिनट, फ़्री पेस चेकर

बोलना शुरू करें दबाइए, एक मिनट बोलिए और रोकें दबाइए, या अपने टेक्स्ट के शब्द और लगा समय लिखिए: टूल आपके शब्द प्रति मिनट बता देगा। अंग्रेज़ी के लिए आम बातचीत की रफ़्तार अक्सर 120–160 शब्द प्रति मिनट और प्रेज़ेंटेशन की 130–150 बताई जाती है; यह टूल 110 से कम को धीमा और 170 से ज़्यादा को तेज़ बताता है।

रफ़्तार नापने के दो तरीके

  1. बोलकर। बोलना शुरू करें दबाइए, वह बोलिए जो आपको सच में बोलना है (मीटिंग की शुरुआत, अपना परिचय, स्पीच का कोई हिस्सा), फिर रोकें दबाइए। समय आपके पहले शब्द से आखिरी शब्द तक गिना जाता है, इसलिए शुरू करने में लगी देर से नतीजा खराब नहीं होता।
  2. नंबर डालकर। अगर आपने रिहर्सल रिकॉर्ड की है या टेक्स्ट तैयार है, तो शब्दों की गिनती और लगे मिनट लिखिए। जैसे 650 शब्दों की स्पीच 5 मिनट में बोली, तो रफ़्तार 130 शब्द प्रति मिनट हुई।

सही माप के लिए कम से कम एक मिनट बोलिए, खड़े होकर और असली आवाज़ में। स्क्रीन के सामने धीमी आवाज़ में पढ़ना हमेशा उस रफ़्तार से तेज़ निकलता है जिसमें आप लोगों के सामने बोलेंगे।

कौन-सी रफ़्तार सामान्य है

कोई आधिकारिक रफ़्तार नहीं है। जो आंकड़े सबसे ज़्यादा बताए जाते हैं, वे अंग्रेज़ी के हैं। हिंदी में "का", "में", "है", "ने" जैसे छोटे शब्द भी अलग-अलग गिने जाते हैं, इसलिए वही बात कहने पर शब्दों की गिनती अंग्रेज़ी से अलग आ सकती है। इन्हें मोटा अंदाज़ा मानिए, नियम नहीं:

स्थितिआम तौर पर बताई जाने वाली रेंजकिस बात पर ध्यान दें
बातचीत120–160 शब्द प्रति मिनट (अंग्रेज़ी)सामने वाले को बीच में बोलने की जगह मिले
प्रेज़ेंटेशन या क्लास130–150 शब्द प्रति मिनट (अंग्रेज़ी)हर नंबर और हर नाम साफ़ समझ आए
टूल जिसे धीमा बताता है110 से कमभावुक पल में यह ठीक हो सकता है
टूल जिसे तेज़ बताता है170 से ज़्यादाअक्सर घबराहट या ठहराव की कमी

किसी तय नंबर से ज़्यादा काम की बात है खुद से तुलना करना। किसी दोस्त से आराम से बात करते हुए अपनी रफ़्तार नापिए, फिर अपनी प्रेज़ेंटेशन की। अगर प्रेज़ेंटेशन 30-40 शब्द प्रति मिनट तेज़ निकले, तो वजह शायद घबराहट है।

धीमे कैसे बोलें

  • हर बात के बाद रुकिए, वाक्य के बीच में नहीं। किसी बात के खत्म होने पर एक सेकंड की चुप्पी सुनने वाले को आत्मविश्वास लगती है, भले आपको वह लंबी लगे।
  • टेक्स्ट पर निशान लगाइए। जहाँ साँस लेनी है वहाँ एक तिरछी लकीर (/) बनाइए, और नंबर व नाम रेखांकित कीजिए। "साढ़े छह लाख", "2.4 करोड़ का टर्नओवर", "Q3 में 18% ग्रोथ" जैसी चीज़ें सबसे धीरे बोली जानी चाहिए।
  • वाक्य छोटे कीजिए। "जो कि… और फिर… क्योंकि…" वाले लंबे वाक्य आपको आखिर तक भागने पर मजबूर करते हैं।
  • बात खत्म करके किसी की तरफ़ देखिए, कमरे में या कैमरे में। इससे अपने आप रुकना पड़ता है।

तेज़ कैसे बोलें

  • दोहराव काटिए। धीमी रफ़्तार की वजह अक्सर यह होती है कि हर बात दो बार कही जा रही है: "मतलब मैं यह कहना चाहता हूँ कि…"
  • वाक्य के बीच के ठहराव हटाइए, सिर्फ़ बात के आखिर वाले रखिए।
  • समय सीमा के साथ रिहर्सल कीजिए। तीन मिनट मिले हैं, तो स्पीच लंबाई कैलकुलेटर से देखिए कितने शब्द आएँगे और टेक्स्ट उसी हिसाब से छोटा कीजिए।

अगर तेज़ बोलने पर फ़िलर बढ़ जाते हैं, तो फ़िलर वर्ड काउंटर से जाँचिए।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या तेज़ बोलना बुरा है?

हमेशा नहीं। कोई मज़ेदार किस्सा तेज़ चल सकता है। दिक्कत तब है जब पूरे समय वही रफ़्तार रहे, खासकर नंबर बताते वक्त, क्योंकि सुनने वालों को समझने का समय नहीं मिलता।

हिंदी में सही रफ़्तार कितनी है?

हिंदी के लिए कोई एक भरोसेमंद आंकड़ा नहीं है, और नतीजा इस पर भी निर्भर करता है कि शब्द कैसे गिने गए। इसलिए किसी नियम से नहीं, अपनी आरामदायक रफ़्तार से तुलना कीजिए।

हर बार नतीजा अलग क्यों आता है?

क्योंकि रफ़्तार विषय, घबराहट और ठहरावों पर निर्भर करती है। एक मिनट से छोटे हिस्से में एक ही ठहराव नंबर को काफ़ी बदल देता है।

क्या मेरी बोली सेव होती है?

नहीं। आपके ब्राउज़र की स्पीच सर्विस बोली को टेक्स्ट में बदलती है और हिसाब आपके डिवाइस पर होता है। Speaking Coach को कुछ नहीं मिलता।

इंटरव्यू के लिए कौन-सी रफ़्तार ठीक है?

ऐसी जिसमें आपकी बात बिना मेहनत के समझ आए और आपको सोचने का समय मिले। अगर टूल 170 से ऊपर दिखाए, तो हर उदाहरण और हर नंबर से पहले एक पल रुकिए।